HERBAL GARDEN
लोध्र
Classification
चरक- शोणितस्थापन, सन्धानीय, पुरुषसंग्रहणीय, कषायश्कन्ध
सुश्रुत- लोध्रादि, व्यग्रोधादि
भावप्रकाश-
Synoyms
स्थूलवल्कल- मोटी छाल वाला।
लाक्षाप्रसादन - लाक्षा (लाख) की सफाई में उपयोगी।
गालव -आँखों में जलस्त्राव कराता है।
निरीर -ज्वर, अतिसार, शोथ आदि नाशक ।
नित्वक - अंगों का स्नेहन करता है।
Habit
वृक्ष up to 40-50 high
Habitat
यह भारत मेंकुमाऊँ से आसाम, बंगाल तथा नेपाल, म्यामार आदि के जंगलों व छोटे पहाड़ों पर पाया जाता है।
Morphology
- इसका सदाहरित मध्यम प्रमाण का (6 मी. तकऊँचा) वृक्ष होता है।
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छाल खुरदुरी व गहरी धूसर वर्ण की होती है।
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पत्र अण्डाकार-आयताकार, चर्मवत्, पत्राग्र तीक्ष्ण या कुण्ठित, पत्र तट आरावत्, अस्पष्ट गोलवन्तुर, 8-16 से.मी. लम्बे, सूखे पत्तों मे पार्श्व सिराएँ स्पष्ट, सिराएँ 5-9 जोड़ी, पत्रवृन्त 6-12 मि.मी. लम्बाहोता है।
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पुष्प पीतवर्ण, सुगन्धित व गुच्छों में होते हैं।
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फल 12 मि.मी. लम्बा, आयताकार, चिकना, कड़ा, बैंगनी कृष्ण वर्ण व 1-3 बीज युक्त होता है।
- इसके छाल की गन्ध हल्की मधुर होती है जो कि बन्द डिब्बों में रखने से तेज हो जाती है तथा इसका स्वाद मधुर, सुगन्धित व कुछ दाहजनक होता है।
Chemical Composition
Loturine, Collaturine, Lotaridine
Guna-Karma
Rasa- कषाय
Guna- गुरु,स्निग्ध
Virya- शीत
Vipaka- कटु
Karma- आर्तवसंग्रहणीय, रक्तस्तंभन, पुरीवसंग्रहणीय
Doshakarma- कफपित्तशामक
Medicinal uses
प्रदर
प्रवाहिका
प्रसूतिका विकार
अतिसार
नेत्ररोग
रक्तपित्त
Useful Part
त्वक
Doses
चूर्ण (1-3 gm)
क्वाथ 40-80 ml
Important Formulation
लोध्रासव
पुष्यानुग चूर्ण
बृहत्गंगाधरचूर्ण
Shloka
लोध्रः शीतो गुरुस्तिक्तः कषायो रक्तपित्तजित्।
कफपित्तास्रशमनो व्रणशोधनरोपनः॥"
(भा.प्र.नि. हरीतक्यादिवर्ग 216)
Hindi Name
लोध
English Name
Lodh
Botanical Name
Symplocos racemosa
Family
Symplocaceae
